Saturday, March 26, 2022

माटी में बहुत दम है

माटी में बहुत दम है 
जहाँ जहाँ झुक के छु लिया सीके ने 
वहाँ पावर पैसा लठैत सब लगा दो फिर भी 
भ्रष्ट निकम्मा नेता कार्यकर्ता कम है 

पैसा के बल पर अगर क्रान्ति होती 
तो क्रांति होती ही नहीं 
क्रान्ति लेकिन होती आयी है 
एक बार क्रान्ति प्रयाप्त होती है 
अगर उस क्रान्ति के मैंडेट का आदर हो 
लेकिन अनादर हुवा है 
बार बार हुवा है 
इस चुनाव को क्रान्ति बना दो 
विजय तुम्हारा है 

बहुदल प्रयाप्त था 
अगर नेता इमान्दार होते 
गणतंत्र प्रयाप्त था 
अगर नेता इमान्दार होते
संघीयता प्रयाप्त था 
अगर नेता इमान्दार होते
लेकिन नेता कार्यकर्ता गद्दार हैं 

बहुदल से आर्थिक क्रांति तक का सीधा रास्ता उपलब्ध था 
गणतंत्र से आर्थिक क्रांति तक का सीधा रास्ता उपलब्ध था
संघीयता से आर्थिक क्रांति तक का सीधा रास्ता उपलब्ध था
लेकिन चोरी में मस्त थे, रास्ता तय हुवा नहीं 
इसिलिए बार बार क्रान्ति 
हजार बार क्रान्ति 






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